धराली में हेली रेस्क्यू ऑपरेशन से जिंदगी की तलाश जारी, नौ लोगों को सुरक्षित निकाला

उत्तरकाशी के धराली में बादल फटने से मची तबाही के बाद बुधवार दोपहर मौसम खुलने पर बचाव अभियान ने जोर पकड़ा। जिला प्रशासन के अनुसार सेना के दो घायल जवानों को हेलिकॉप्टर से हायर सेंटर भेजा गया है। आपदा में छह लोगों की मौत हो गई है। जबकि कई लोग लापता हैं।
सड़कें अवरुद्ध और क्षतिग्रस्त होने से धराली नहीं पहुंची टीम
उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे बचाव कार्यों पर एनडीआरएफ के डीआईजी गंभीर सिंह चौहान ने कहा कि हमारे पास चार टीमें हैं, लेकिन सभी सड़कें अवरुद्ध और क्षतिग्रस्त होने के कारण वे धराली नहीं पहुंच सके। कल 35 कर्मचारी हेलिकॉप्टरों के माध्यम से पहुंचने में सक्षम थे। हेलिकॉप्टर सेवाएं शुरू होने के साथ ही कर्मचारियों और निकाले गए लोगों का आना-जाना शुरू हो गया है। संचार संबंधी समस्या भी थी, लेकिन आज सुबह से हमारे सैटेलाइट फोन काम कर रहे हैं। राज्य प्रशासन, सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ और यहां तक कि स्थानीय लोग भी खोज और बचाव कार्यों में एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं
चीन सीमा से पोकलैंड मशीनें एयरलिफ्ट
उत्तरकाशी धराली में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हुए रास्तों को खोलने के लिए भारतीय वायुसेना की मदद से पोकलैंड मशीनों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है। सीमा सड़क संगठन के जवान दिन-रात इन रास्तों को साफ करने में जुटे हैं।
हेलिकाप्टर से पहुंची टीम, बनी झील का किया निरीक्षण
आपदा के बाद हर्षिल में भागीरथी नदी में बन गई झील के निरीक्षण के लिए सिंचाई विभाग की टीम पहुंची है। टीम के अनुसार झील से पानी की निकासी हो रही है, चिंता जैसी कोई बात नहीं है। अवरोध को हटाने के लिए भी योजना बनाई गई है। आपदा के दौरान तैलगाड गधेरे से मलबा आने से भागीरथी नदी में झील बन गई। इस झील के पानी से हर्षिल से जाने का वाला मार्ग भी प्रभावित हुआ है। इस झील को हटाने और पानी का प्रवाह को सामान्य करने के लिए सिंचाई विभाग की टीम को भेजा गया था। इसमें विभागाध्यक्ष सुभाष कुमार, अधीक्षण अभियंता संजयराज के साथ अन्य अधिकारयों की टीम पहुंची। अधिकारियों के मुताबिक झील की लंबाई करीब 1200 और चौड़ाई 100 मीटर है। इस झील से पानी की निकासी हो रही है, पर मलबे को हटाने की योजना बनाई गई है। इसमें मार्ग खुलने के बाद चार पोकलेन मशीन के माध्यम से मलबा हटाया जाएगा। पोकलेन की व्यवस्था करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
नौ यात्रियों को हेली से मातली लाया गया
हर्षिल राहत कैंप में रुके हुए नौ यात्रियों को आज हेली से मातली लाया गया।
उत्तराकाशी में हेली रेस्क्यू ऑपरेशन, सीएम ने की राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज गुरुवार सुबह उत्तरकाशी में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर धराली क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। साथ ही आज सुबह से प्रभावित क्षेत्रों में शुरू हुए हेली रेस्क्यू ऑपरेशन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान उन्हें सड़क, संचार और बिजली की शीघ्र बहाली के साथ-साथ पेयजल व खाद्यान्न आपूर्ति की सघन निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन में 24 घंटे जुटी सभी टीमों के साहस और समर्पण की सराहना करता हूं। विषम परिस्थितियों में भी इन दलों की निष्ठा और कार्यकुशलता आपदा प्रबंधन में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।
मंगलवार को हर्षिल घाटी में तीन जगह बादल फटने से आए सैलाब व मलबे की वजह से धराली गांव में कई बहुमंजिला होटल और रेस्टोरेंट जमींदोज हो गए थे। वहीं कई लोग मलबे में फंस गए थे। हालांकि पहले दिन खीर गंगा में बार-बार आ रहे मलबे और गंगोत्री हाईवे के जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रशासनिक अमला और अन्य राहत टीमें घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाईं थीं, लेकिन बुधवार को मौसम खुलने के बाद हेलिकॉप्टरों ने उड़ान भरी और बचाव दल मौके पर पहुंच गए।
धराली गांव और हर्षिल स्थित सेना के कैंप में आए मलबे के दूसरे दिन बुधवार को तेजी से जिंदगियों की तलाश शुरू जारी है। सेना, आईटीबीपी और एसडीआरएफ की टीमें हेलिकॉप्टर से खोज और बचाव कार्य में जुटी रहीं। इस दौरान दो शव मिले हैं, जिससे अब मृतकों की संख्या छह हो गई है। वहीं, हर्षिल में मलबे में फंसे 11 जवानों समेत 13 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है। जिला प्रशासन के अनुसार सेना के 10 जवान समेत 20 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। वहीं आशंका यह भी है कि यह संख्या और बढ़ सकती है।
उत्तरकाशी के धराली में बादल फटने से मची तबाही के बाद बुधवार दोपहर मौसम खुलने पर बचाव अभियान ने जोर पकड़ा। जिला प्रशासन के अनुसार सेना के दो घायल जवानों को हेलिकॉप्टर से हायर सेंटर भेजा गया है। धराली के आठ स्थानीय युवक, नेपाली मूल के दो व्यक्ति और सेना के 10 जवान समेत 20 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। वहीं, आशंका यह भी है कि यह संख्या और बढ़ सकती है।
धराली में आई आपदा के दूसरे दिन भी रास्ते भूस्खलन की वजह से जगह-जगह बंद थे। जिससे बचाव और राहत कार्य में बाधा आई। भटवाड़ी स्थित हेलीपैड से दो हेलीकॉप्टरों के माध्यम से राहत सामग्री, खाद्य सामग्री और बचाव उपकरण धराली क्षेत्र में पहुंचाई गए। सेना के हेलीकॉप्टर से बचाव कार्य संबंधी भारी मशीनरी पहुंचाई जा रही है। आइटीबीपी, एनडीआरएफ, पुलिस आदि बचाव दल भटवाड़ी में राष्ट्रीय राजमार्ग पर बड़ी चट्टान गिरने के कारण आगे नहीं बढ़ सके, पूरा रास्ता ध्वस्त होकर क्षतिग्रस्त हो चुका है।




